My Quotations, ShaluguptaPhotography

A little something

 

कुकर की सिटी से सूफ़िया का ध्यान हटा खिड़की पर से, उसने दरवाजे से बाहर देखा समीर अभी भी पेपर को घूर रहे थे.. वापस कुकर की तरफ देखा और बोली लगता आज कुछ ज़्यादा गुस्से मे हैं.. तभी ईशा घड़घदाती हुयी नीचे आई, सूफ़िया को गले लगाया, और हाथ मे लिफ़ाफ़ा थमाते हुए बोली ईद मुबारक अम्मी ये आपका और ये पापा का..
तुम खुद ही दो ना सूफ़िया झिड़कते हुए बोली..
अम्मी बस दो घंटे का काम है गुस्सा मत करो
बाहर आकर समीर को लिफ़ाफ़ा देते हुए बोली.. पापा ईद मुबारक हो, अम्मी गुस्से मे है.. संभाल लो ना..
समीर- ईद के दिन कौन जाता है परिवार छोड़ कर .. फिर थोड़ा रुकते हुए बोले जाओ जल्दी आना,, शायद उन्हे अपने दिन याद आ गये जब सूफ़िया से नयी शादी हुई थी.. यही शब्द कहे थे सूफ़िया ने पहली ईद पर.
ध्यान हटा तो देखा ईशा जा चुकी है, गोद मे एक लिफ़ाफ़ा था, खोल कर देखा तो उसमे एक नोट कुछ पैसे और एक लिफ़ाफ़ा और था.. नोट मे लिखा था , ईद मुबारक! आपकी ईदी और लिफाफे में आपकी तरफ से अम्मी के लिए.. समीर ने मुस्काराकर दोनो लिफाफे जेब मे रखे और अपने आप से बोले- ईदी , फिर सीरीयस लुक में वापस आ गये और बोले – लेकिन मैं अभी भी गुस्सा हूँ.

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